चंचल मन !
- Anurag Sharma
- Dec 8, 2019
- 2 min read
Updated: Mar 11, 2023
यूँ ही एक भरी दोपहर में, अचानक से मानो आसमान से चांदी बरसने लगी। तेज़ हवाएं जो उन्हें कहीं दूर मुझसे ले जा कर, मानो हर पेड़ के पत्तों को सजाने के लिए बेबाक दौड़ रही थीं। बारिश की हल्की फुहारों से बचकर मैंने एक आशियाना तो ढूंढ लिया, और निहारने लगा आसमान से गिरते रूई से हल्के बर्फ के फ़ाहों को। कुछ बूंदें आकर मेरे चश्मे से लिपट गयी, मानो जल रहीं हो बर्फ से, क्योंकि हर कोई बस हिमपात के लिए ही बाहर निकल कर आया था, मानो वो अपनेपन का एहसास कराना चाहती थीं। मैं भी हल्के फ़ाहों में इतना मशगूल था की, उसकी भावनाओं की कदर न की, और कंपकपाते हाथों को जेब से बाहर निकाल उन बूंदों को साफ कर, चश्मा पहन कर बर्फ का आनंद लेने लगा।

सब ठहर सा गया था, कुछ बदल रहा था तो बस मौसम। अचानक खयाल घर का आया, ऐसे ही किसी कंपकंपाते दोपहर जब मैं स्कूल से घर लौट आता था, तो माँ अंगीठी सुलगाती हुई आंगन मे मेरा इंतेज़ार कर रही होती थी। मैं भी शायद माँ को देख कर राहत सी पाता था, महसूस होता था पर आभास नहीं। लेकिन अब होता है, उसकी हर बात में फिक्र दिखती है, शायद तभी उसके बाल सफेद हो आए हैं। वो कहते हैं न अंग्रेजी में "साल्ट एंड पैपर", हाँ बस कुछ वेसे ही। तभी कैंटीन से किसी ने आवाज़ लगाई " बहुत ठंड है, अंदर आ जाओ डॉ साहब" और खयाल बर्फ के फाहे सा पिघल गया । चाय की चुस्की पर कुछ बातें हुई, कुछ हँसी मज़ाक और दिन ढल गया।

बदलते मौसम के साथ, हमारी इच्छाएं भी बदल जाती है, यह जानते हुए भी की अगर बर्फ़बारी न रुकी तो दिक्क़तें होंगी, जीवन अस्त व्यस्त हो जाएगा, पर फिर भी बदलाव के लिए ही सही हम एक नए एहसास से रिश्ता जोड़ बैठ जाते हैं। उन बारिश की बूंदों ने न जाने कितने ही अनुभव हमारी ज़िन्दगी में जोड़े हों, भले ही वो स्कूल न जाने का बहाना बनी हों, पहले प्यार की पहली बारिश बनके हमे भिगाया हो या फ़िर किसी सर्द रात में हमारी तन्हाई का साथी बनी हों। लेकिन हर बदलते मौसम के साथ एक नयापन ढूंढता हमारा ये चंचल मन, शायद अनदेखा कर देता है उसे जो बहुत लंबे समय से हमारा था और हमारा रहेगा। बर्फ तो यूँ भी कुछ पलों की मेहमान है, याद रहे कल सुबह की पहली किरण के साथ ही यह भी बूंद बनकर बहना शुरू कर देगी। लेकिन फिर भी हम एक बार फ़िर इंतेज़ार करेंगे मौसम बदलने का, पीले से उन पत्तों के गिरने का, फूलों के खिलने का, और शायद उन्हीं बूंदों के बरसने का और नई उमंगें ढूंढने का !
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Place: Kasauli, Himachal Pradesh
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